रायबरेली। हजरत मखदूम बदरुद्दीन बदरे आलम साहब रहमतुल्लाह की ऐतिहासिक दरगाह पर इन दिनों बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुँच रहे हैं। दरगाह परिसर में स्थित एक पुराने कुएँ के बारे में कई मान्यताएँ जुड़ी हैं, जिसे स्थानीय लोग करामाती कुआँ कहकर पुकारते हैं। सूत्रों के अनुसार, कई लोग जिन्न-जिन्नात, बंदिश, रोज़गार में रुकावट, वैवाहिक समस्याएँ, घरेलू खलल और मानसिक बेचैनी जैसी परेशानियों के समाधान की उम्मीद से यहाँ आते हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि कुएँ के पानी से नहाने से उन्हें मानसिक शांति और राहत मिलती है। दरगाह पर सेवा कर रहे मोहम्मद इमरान हाफिज ने बताया कि लोग अपनी परेशानियों को लेकर उनके पास आते हैं और परंपरा के अनुसार कुएँ के पानी का उपयोग करके राहत महसूस करने की बात कहते हैं। उन्होंने बताया कि यह सब श्रद्धा और आस्था पर आधारित परंपरा है, और वर्षों से लोग यहाँ मन की शांति के लिए आते रहे हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कुआँ सदियों पुरानी विरासत है, और इससे जुड़ी मान्यताएँ आज भी लोगों को आकर्षित करती हैं। हालाँकि, विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी शारीरिक बीमारी के लिए चिकित्सकीय उपचार आवश्यक है, और आस्था के साथ चिकित्सा दोनों ही महत्वपूर्ण हैं। दरगाह में रोज़ाना दूर-दराज़ से आने वालों का ताँता लगा रहता है, जो यहाँ सुकून और रूहानी राहत पाने की उम्मीद लेकर पहुँचते हैं।
मखदूम बदरुद्दीन बदरे आलम रहमतुल्लाह की दरगाह के करामाती कुएँ पर बढ़ रहा श्रद्धालुओं का विश्वास
