महराजगंज (रायबरेली)। स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी के बीच क्षेत्र में संचालित निजी अस्पताल एक बार फिर चर्चा में हैं। चंदापुर मार्ग स्थित उजाला हॉस्पिटल में लगभग 35 वर्षीय महिला की मौत के बाद इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। परिजनों के अनुसार, महिला का छह माह पूर्व रायबरेली मार्ग स्थित एक निजी अस्पताल में ट्यूमर का ऑपरेशन हुआ था। इसके बाद पथरी की समस्या होने पर उजाला हॉस्पिटल में इलाज कराया गया, जहां बाहर से डॉक्टरों की टीम बुलाकर ऑपरेशन किए जाने की बात सामने आई है। आरोप है कि ऑपरेशन के बाद महिला की तबीयत बिगड़ती गई और अस्पताल का अप्रशिक्षित स्टाफ ही इलाज करता रहा। हालत गंभीर होने पर जिला अस्पताल भेजा गया, जहां से लखनऊ रेफर कर दिया गया। लखनऊ पहुंचने पर चिकित्सकों ने महिला को मृत घोषित कर दिया।
महिला की मौत से दो बच्चों के सिर से मां का साया उठ गया। बताया जा रहा है कि घटना के बाद अस्पताल संचालक ने परिजनों को समझा-बुझाकर अंतिम संस्कार करा दिया। हालांकि गांव में चर्चा है कि मामले को दबाने के लिए ‘सेटिंग’ की गई। मामले में अस्पताल संचालक से संपर्क का प्रयास किया गया लेकिन बात नहीं हो सकी। वहीं सीएचसी अधीक्षक डॉ. गण नायक पांडे ने ऐसी किसी घटना की जानकारी से इनकार किया है।
निजी अस्पतालों पर कार्रवाई क्यों नहीं करता स्वास्थ्य विभाग?
क्षेत्र में कई निजी अस्पताल बिना पंजीकरण और मानकों को पूरा किए संचालित होने की चर्चा है। आरोप है कि कई जगह न तो एमबीबीएस डॉक्टर हैं और न ही सर्जन, इसके बावजूद भर्ती से लेकर बड़े ऑपरेशन तक किए जा रहे हैं। मरीजों की देखभाल भी अप्रशिक्षित स्टाफ के हवाले बताई जा रही है।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर स्वास्थ्य विभाग की नजर इन अस्पतालों पर क्यों नहीं पड़ रही? क्या कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित है? मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
उजाला हॉस्पिटल में महिला की मौत से हड़कंप, स्वास्थ्य विभाग पर फिर उठे सवाल
