रायबरेली (एनपीआर नेटवर्क)। अवध क्षेत्र की ऐतिहासिक नगरी डलमऊ को नगर पंचायत के रूप में पहचान अंग्रेजी हुकूमत के दौरान मिली थी। वर्ष 1893 में ब्रिटिश शासन ने आगरा के साथ डलमऊ को भी नगर पंचायत का दर्जा प्रदान किया था। इसी के साथ डलमऊ आधिकारिक तौर पर नगर निकाय के रूप में अस्तित्व में आया।उस दौर में गंगा के जलमार्ग के कारण डलमऊ एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र माना जाता था। जलमार्ग से आने वाले व्यापारी इसी नगर में रुककर अपना कारोबार करते थे। व्यापारिक महत्व, आबादी और भौगोलिक स्थिति को देखते हुए अंग्रेजी प्रशासन ने इसे नगर पंचायत घोषित किया था।नगर पंचायत बनने के समय डलमऊ का क्षेत्रफल लगभग 8.53 वर्ग किमी था और इसमें कुल छह वार्ड शामिल थे। समय के साथ नगर का विस्तार हुआ और 1992 में चार नए वार्ड जोड़े गए। वर्तमान में डलमऊ नगर पंचायत में कुल 10 वार्ड हैं।इतिहास, संस्कृति, व्यापार और राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र रहे डलमऊ की नगर पंचायत आज करीब 131 वर्ष पुरानी है और लगातार विकास की नई चुनौतियों और अपेक्षाओं के साथ आगे बढ़ रही है।
डलमऊ नगर पंचायत का गठन वर्ष 1893 में, अंग्रेजी हुकूमत ने दिया था नगर का दर्जा
