रायबरेली | न्यूज़ प्लस रिपोर्ट
टेट (TET) अनिवार्यता के विरोध में सोमवार देर शाम शहर में शिक्षकों ने जोरदार मशाल जुलूस निकालकर सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। यह जुलूस अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के आह्वान पर जिला मुख्यालय स्थित विकास भवन से प्रारंभ हुआ और डिग्री कॉलेज चौराहा, कैनाल रोड, अस्पताल चौराहा, चंदापुर मंदिर, हाथी पार्क, अंबेडकर चौक और कचेहरी रोड होते हुए कलेक्ट्रेट परिसर में समाप्त हुआ।
जुलूस में शामिल शिक्षकों ने आरटीई एक्ट लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को टेट परीक्षा से छूट देने की मांग की। शिक्षकों का कहना था कि नियुक्ति के समय जो अर्हताएं लागू थीं, उसी के आधार पर उन्होंने नौकरी प्राप्त की थी, ऐसे में वर्षों की सेवा के बाद नई शर्तें लागू करना पूरी तरह अन्यायपूर्ण है।
महासंघ के जिला संयोजक महेंद्र यादव, शैलेश यादव तथा अटेवा के जिला संयोजक इरफान अहमद ने कहा कि पहले से कार्यरत शिक्षकों पर टेट अनिवार्यता थोपना न्यायसंगत नहीं है और इसे तुरंत समाप्त किया जाना चाहिए। टीएससीटी के जिला संयोजक अनुराग मिश्रा ने कहा कि यह आंदोलन अभी पहला चरण है और आवश्यकता पड़ने पर यह लड़ाई न्यायालय तक लड़ी जाएगी।
शिक्षकों ने कहा कि सेवा के अंतिम पड़ाव पर खड़े शिक्षकों को दोबारा परीक्षा देने के लिए बाध्य करना मानसिक उत्पीड़न है। जिस प्रकार खेल शुरू होने के बाद उसके नियम नहीं बदले जा सकते, उसी प्रकार नियुक्ति के बाद अर्हताओं में बदलाव करना भी अनुचित है।
कार्यक्रम में धर्मेंद्र शर्मा, अंजनि मौर्य, धीरज श्रीवास्तव, मिथलेश मौर्य सहित कई शिक्षक नेताओं ने अपने विचार रखे और सरकार से जल्द निर्णय लेने की मांग की। इस दौरान बड़ी संख्या में शिक्षक मौजूद रहे और एकजुट होकर आंदोलन को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
टेट अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षकों का मशाल जुलूस, बोले—पुराने शिक्षकों पर नई शर्तें नहीं होंगी स्वीकार
