संत कृपाल जी महाराज ने किया सत्संग, मानव सेवा को बताया सर्वोच्च धर्म

गदागंज रायबरेली (एनपीआर नेटवर्क)। दीन शाह गौरा क्षेत्र के सुट्टा हरदो गाँव में गुरुवार शाम लगभग 5 बजे मध्य प्रदेश ग्वालियर से पधारे संत कृपाल महाराज ने ग्रामीणों के साथ बैठकर सत्संग किया। सत्संग में महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि “किसी का दर्द बाँटना ही मानव सेवा का सबसे बड़ा धर्म है।”उन्होंने अपने प्रवचन में एक मुहावरा भी सुनाते हुए जीवन के महत्व को समझाया—“जीवन खत्म हुआ तो जीने का ढंग आया,क्षमा भुज चली तो महफ़िल में रंग आया,जब ठीक से चलना सीखा तो बूढ़े तन के हर पुर्जे में जंग आया,और फुर्सत के वक़्त में न सुमिरन को वक्त माँगा, न वक्त आया।”महाराज जी ने कहा कि मनुष्य को अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए और माता-पिता के प्रति सम्मान तथा संवेदनाएं रखना हर व्यक्ति का धर्म है। उन्होंने समझाया कि “दौलत यहीं रह जाती है, इसलिए जीवन में संस्कार और सेवा ही सच्ची पूंजी है।”इसके बाद संत कृपाल महाराज ने पुष्पा कुमारी आदर्श गुरुकुल विद्यालय पहुँचकर बच्चों का हाल-चाल पूछा और उन्हें अच्छी राह पर चलने की प्रेरणा दी।इस अवसर पर कुंवर दुष्यंत सिंह, कुमार समर सिंह, विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष पुष्कर सिंह, प्रेम श्रीवास्तव, गदागंज थाना प्रभारी दयानंद तिवारी सहित कई सम्मानित लोग उपस्थित रहे।

रिपोर्ट– आलम क़ादरी,

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