रमजान में तरावीह की नमाज़ सुन्नते मोक्किदा, बिना वजह छोड़ना गुनाह: हाफिज मुजफ्फर

डलमऊ (रायबरेली)। पाक महीने रमजान के मौके पर जुमे की नमाज़ के बाद हाफिज मुजफ्फर ने तरावीह की अहमियत पर तकरीर करते हुए लोगों को इसकी फजीलत बताई। उन्होंने कहा कि तरावीह की नमाज़ सुन्नते मोक्किदा है और हर स्वस्थ व समझदार मुसलमान के लिए इसे पढ़ना जरूरी माना गया है।हाफिज मुजफ्फर ने बताया कि अगर कोई व्यक्ति बीमारी, सफर या किसी जरूरी काम की वजह से तरावीह नहीं पढ़ पाता है तो उसे माफी है, लेकिन बिना किसी वजह के इसे छोड़ना गुनाह माना जाता है। उन्होंने कहा कि तरावीह की नमाज़ मर्द और औरत दोनों पढ़ सकते हैं और यह नमाज़ रमजान का चांद दिखाई देने से शुरू होकर ईद‑उल‑फितर के चांद से एक दिन पहले तक पढ़ी जाती है।उन्होंने कहा कि रमजान का महीना इस्लाम में सबसे अफजल महीना माना जाता है। इस मुकद्दस महीने में अल्लाह की खास रहमत और बरकत बरसती है। रोजा, नमाज़ और इबादत करने वालों को अल्लाह खास इनाम अता करता है।हाफिज मुजफ्फर ने कहा कि रमजान के महीने में अगर कोई व्यक्ति एक नेकी करता है तो उसे सामान्य दिनों के मुकाबले सत्तर गुना ज्यादा सवाब मिलता है। इसलिए हर मुसलमान को चाहिए कि इस पाक महीने में ज्यादा से ज्यादा इबादत करे और नेक कामों में हिस्सा ले।

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