डलमऊ में मजिस्ट्रेट लिखी कार ने मासूम को रौंदा, मौत — कस्बे में तेज रफ्तार वाहनों पर बड़ा सवाल

डलमऊ (रायबरेली)।
डलमऊ कस्बे में बुधवार को दर्दनाक हादसे में रिटायर फौजी के 10 वर्षीय बेटे अली हुसैन की मौत हो गई। मुराईबाग की ओर से आ रही मजिस्ट्रेट लिखी तेज रफ्तार चार पहिया गाड़ी ने सड़क पार कर रहे मासूम को रौंद दिया। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और परिजनों में कोहराम मच गया।
मोहल्ला शेखवाड़ा निवासी रिटायर फौजी आफाक हुसैन बीते करीब एक माह से मोहल्ला मियांटोला स्थित नवनिर्मित मकान में रह रहे थे। बुधवार सुबह उनका बेटा अली हुसैन सड़क पार कर रहा था, तभी UP32 0C 1917 नंबर की तेज रफ्तार कार ने उसे कुचल दिया। गंभीर हालत में अली को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
अली अपने पिता के पांच भाइयों के परिवार में इकलौता पुत्र था। वह कक्षा पांच का छात्र था। उसकी मां नौशीन अख्तर और बहनों नाजया व हीरा का रो-रोकर बुरा हाल है। पिता सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद एम्स में सिक्योरिटी गार्ड के पद पर कार्यरत हैं।
सबसे बड़ा सवाल: डलमऊ जैसे घनी आबादी वाले कस्बे में जब मजिस्ट्रेट लिखी सरकारी गाड़ी ही तेज रफ्तार से दौड़ती नजर आ रही है, तो आम वाहनों की रफ्तार पर रोक कैसे लगेगी? प्रशासन की गाड़ियां ही नियमों का पालन नहीं करेंगी, तो सड़क सुरक्षा के नियमों का क्या महत्व रह जाता है। ऐसे में सवाल यह भी है कि क्या सरकारी वाहन सड़क हादसों के जरिए खुद सरकार की छवि को नुकसान नहीं पहुँचा रहे हैं ? क्या प्रशासन कस्बे में तेज रफ्तार वाहनों पर लगाम लगाएगा या ऐसे हादसे यूँ ही मासूमों की जान लेते रहेंगे?

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