वसंत पंचमी पर डलमऊ में साहित्यकारों ने किया महाप्राण निराला का स्मरण, सरस्वती पूजन के साथ गूंजा काव्य-पाठ

डलमऊ (रायबरेली)। वसंत पंचमी के अवसर पर डलमऊ के साहित्यकारों द्वारा मां सरस्वती का पूजन व प्रसिद्ध कवि सूर्य कांत त्रिपाठी निराला जी के जीवन पर प्रकाश डाला गया। कार्यक्रम का आयोजन शंकर नगर मुराई बाग में किया गया। मान्यता है कि वसंत पंचमी ज्ञान की देवी मां सरस्वती का जन्म दिन है।इसी दिन महाप्राण निराला जी भी अपना जन्मदिन मनाया करते थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ कवि राम नारायण रमण ने कहा कि आज का दिन दुनिया भर में साहित्य पर्व के रूप में मनाया जाना चाहिए। डलमऊ की भूमि निराला जी की कर्मस्थली होने के कारण प्रणम्य है।हम सब लोग इस धरती की उपज होने के कारण गौरवान्वित हैं। कवि रमाकांत ने कहा कि निराला मनुष्यता के पक्षधर विरले कवि रहे हैं जिनसे हिन्दी साहित्य संसार धन्य हुआ। कवि एवं आलोचक वाई.वेद प्रकाश ने कहा कि निराला सामाजिक क्रांति एवं रूढ़िभंजन के लिए जाने जाते रहे हैं।आज हम सब लोग उनकी स्मृति को चिरस्थाई बनाए रखने हेतु कटिबद्ध हैं। डॉ जितेन्द्र मौर्या ने कहा कि निराला गहरे युग बोध के कवि हैं। सुंदर लाल मनमौजी ने कहा कि निराला जी मानवता के उद् घोषक कवि रहे हैं। सविता यादव ने बताया कि निराला क्रांतिधर्मी मनस्विता के महान सरस्वती साधक थे। स्मृति मिश्रा ने कहा कि निराला जी साहित्य व समता के झंडाबरदार कवि रहे हैं। अंजलि बाजपेई ने कहा कि हमें साहित्य की उस निष्ठा और परम्परा को आगे बढ़ाने का संकल्प लेना चाहिए।सत्य प्रकाश त्रिवेदी ने कहा कि निराला जी साहित्य की दुनिया में एक युगांतरकारी कवि की तरह थे। अशेष बाजपेई ने कहा कि निराला जी के बताए मार्ग पर चलने की आवश्यकता है। इस अवसर पर सम्राट, सत्य प्रकाश, आन्या प्रिया,सत्येन्द्र कुमार, खुशबू, एंजेलिना प्रिया,महक,सौम्या,पूनम सिंह पुष्प,वेद प्रकाश,आर्यन यादव अमित यादव, सुषमा यादव, मनोज कुमार मंजुल, रिया, बसंत लाल गुप्ता, दयाराम यादव, डॉ गीता पाण्डेय आदि ने मां सरस्वती का पूजन व महाप्राण निराला को अपनी काव्यांजलि अर्पित की।

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