रायबरेली। जिले के सलोन कस्बे में स्थित मियां साहब के फाटक पर 349वें सालाना उर्स का आगाज आगामी 19 अक्टूबर से होगा। खानकाहे करीमिया नईमियां में आयोजित होने वाले इस उर्स को लेकर तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। उर्स में जिले सहित दूर-दराज के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में अकीदतमंदों और जायरीनों के पहुंचने की उम्मीद है। आयोजन के दौरान लंगर, महफिल-ए-समा और विशेष दुआओं के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
सूफी परंपरा का ऐतिहासिक केंद्र है उर्स
सलोन कस्बे का मियां साहब का फाटक लंबे समय से धार्मिक आस्था और सूफी परंपरा का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहां हर साल आयोजित होने वाले उर्स में बड़ी संख्या में जायरीन शिरकत करते हैं। मान्यता और परंपरा के अनुसार, यह आयोजन लोगों को आध्यात्मिक शांति, भाईचारे और आपसी सौहार्द का संदेश देता है।
25 हजार तक जायरीनों के पहुंचने की उम्मीद
उर्स के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए सैयद अदनान मियां ने बताया कि यह आयोजन करीब साढ़े तीन सौ साल पुरानी महान सूफी परंपरा का हिस्सा है। उन्होंने बताया कि उर्स के दौरान देश के दूर-दराज के इलाकों से अकीदतमंद दुआएं करने और दरगाह पर हाजिरी लगाने पहुंचते हैं। पिछले आयोजनों में लगभग 25 हजार तक लोगों की भीड़ जुटने की बात भी सामने आती रही है।
लंगर और महफिल-ए-समा होंगे आकर्षण
उर्स के दौरान जायरीनों के लिए लंगर की व्यवस्था की जाएगी। इसके साथ ही महफिल-ए-समा और विशेष दुआओं के कार्यक्रम भी आयोजित होंगे। आयोजन को लेकर खानकाह परिसर में तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। उर्स में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने से स्थानीय बाजार और व्यापारिक गतिविधियों में भी तेजी आने की उम्मीद है।
जायरीनों से की गई अपील
सैयद अदनान मियां ने सभी जायरीनों से उर्स में शिरकत करने और सलोन स्थित सरकार आठोंपीर व सरकार नईम अता शाह की दरगाह पर जियारत कर दुआएं करने की अपील की। उर्स को लेकर स्थानीय लोगों और अकीदतमंदों में उत्साह का माहौल है।
सलोन में 19 अक्टूबर से शुरू होगा 349वां सालाना उर्स, मियां साहब के फाटक पर उमड़ेगा अकीदतमंदों का सैलाब
