ब्लॉक परिसर डलमऊ में प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और क्षेत्रीय लोगों ने शहीद को किया नमन
डलमऊ रायबरेली। देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर सपूत नायक राजेंद्र यादव की 27वीं पुण्यतिथि पर ब्लॉक परिसर डलमऊ में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, अधिवक्ताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और क्षेत्र के संभ्रांत नागरिकों ने शहीद के चित्र पर डलमऊ तहसीलदार यशवंत सिंह, खंड विकास अधिकारी राम खेलावन ने पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया तथा कार्यक्रम को आगे बढ़ाया गया।
डलमऊ तहसील क्षेत्र के मतौली पुर गांव में किसान परिवार में जन्मे नायक राजेंद्र यादव के भीतर बचपन से ही देशसेवा का जज्बा था। माध्यमिक शिक्षा पूरी करने के बाद वर्ष 1984 में वह भारतीय सेना में भर्ती हुए। मेहनत, साहस और कर्तव्यनिष्ठा के बल पर वह नायक के पद तक पहुंचे। वर्ष 1999 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए कारगिल युद्ध के दौरान दुश्मन से लोहा लेते हुए उन्होंने देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।शहीद की पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि नायक राजेंद्र यादव की शहादत देश और समाज के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगी। उनके अदम्य साहस, देशभक्ति और बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उनकी वीरगाथा आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करती रहेगी।
कार्यक्रम में सपा नेता राजेश चंद्रा, मनीष देव पाल, वरिष्ठ अधिवक्ता ओपी यादव, लेखपाल हरिओम त्रिपाठी, पूर्व प्रधान देवराज यादव, तहसीलदार यशवंत सिंह, खंड विकास अधिकारी रामखेलावन वर्मा, ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि पंकज रावत, राम नारायण रमण, मेराज सम्श, मसुद्दीन अजहर, शेर बहादुर, प्रधान राम अभिलाष यादव, इंद्रपाल गौतम, राजेंद्र सरोज, प्रधान राजेश यादव, प्रधान शैलेंद्र यादव, फौजी डीएन यादव, प्रधान दिलीप यादव, अध्यापक संदीप कुमार, किसान नेता मनोज यादव, अखिलेश माही, प्रधान आलोक यादव विक्की, लाल बहादुर क्रांतिकारी, वीरेंद्र किसान, दीपू सिंह प्रधान, अनूप यादव सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन सपा जिला उपाध्यक्ष राजेंद्र यादव ने किया। आयोजन में रामदेव यादव की भूमिका रही, जबकि संयोजक रजत यादव रहे।
शहादत का गर्व, आज भी आंखों में आंसू
नायक राजेंद्र यादव का विवाह वर्ष 1987 में ललिता देवी के साथ हुआ था। उनके दो पुत्र अतुल यादव और रजत यादव तथा पुत्री अनीता यादव हैं। पिता की शहादत को याद करते हुए परिवार भावुक हो जाता है, लेकिन उन्हें इस बात का गर्व भी है कि उनके परिवार के वीर सपूत ने देश की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।परिजनों और ग्रामीणों का कहना है कि राजेंद्र यादव भले ही आज इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी यादें और देश के लिए दिया गया बलिदान आज भी परिवार, मित्रों और क्षेत्रवासियों के दिलों में जिंदा है।
