रायबरेली | न्यूज प्लस रिपोर्ट देश की प्रथम महिला शिक्षिका राष्ट्रमाता सावित्रीबाई फूले की 195वीं जयंती शनिवार को रायबरेली स्थित संत रैदास आश्रम सामुदायिक केंद्र में धूमधाम से मनाई गई। विभिन्न सामाजिक संगठनों के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में समाजसेवी महिलाओं को अंगवस्त्र व बुके भेंट कर सम्मानित किया गया।कार्यक्रम के तहत सावित्रीबाई फूले के जीवन और योगदान पर आधारित विचार संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसका संचालन विश्व दलित परिषद के अध्यक्ष राजेश कुरील ने किया। जयंती समारोह की अध्यक्षता वयोवृद्ध समाजसेवी रामेश्वर प्रसाद मौर्य ने की।सामाजिक चिंतक डॉ. सुनील दत्त ने कहा कि सावित्रीबाई फूले ने 19वीं सदी में विषम परिस्थितियों के बावजूद शिक्षा की अलख जगाई। वे शिक्षिका, लेखिका, कवयित्री और समाजसेविका थीं, जिन्होंने बाल विवाह, सती प्रथा जैसी कुरीतियों का विरोध किया और विधवा पुनर्विवाह का समर्थन किया।बुद्ध विहार कमेटी के संरक्षक इंजीनियर एस.के. आर्या ने कहा कि सावित्रीबाई फूले ने अपने पति ज्योतिबा राव फूले के साथ मिलकर 1 जनवरी 1848 को बालिकाओं के लिए पहला विद्यालय स्थापित किया और महिलाओं की शिक्षा का मार्ग प्रशस्त किया। वहीं इंजीनियर रोहित प्रतिपक्षी ने उनके जीवन संघर्ष और सामाजिक आंदोलनों पर प्रकाश डाला।समण संस्कृति के संयोजक आर.एस. कटियार और डॉ. जे.के. भारत ने बताया कि प्लेग पीड़ितों की सेवा करते हुए 10 मार्च 1897 को सावित्रीबाई फूले का निधन हुआ, लेकिन उनका योगदान आज भी समाज को प्रेरित करता है।कार्यक्रम में सत्येश गौतम, प्रीतम कुमार, पुष्पा देवी, कमला बौद्ध, चंद्रशेखर, राजेंद्र बौद्ध, हरिप्रसाद शास्त्री सहित अनेक वक्ताओं ने विचार रखे। इस अवसर पर कमला बौद्ध, पुष्पा रावत, अर्चना मोदनवाल, पूजा अग्रहरि, उर्मिला, गीता और सुनीता दिवाकर सहित कई महिलाओं को सम्मानित किया गया।कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
रायबरेली में सावित्रीबाई फूले की 195वीं जयंती धूमधाम से मनाई गई
