रायबरेली (न्यूज़ प्लस रिपोर्ट): मस्जिद वज़ीरगंज में चल रहे सात दिवसीय ‘स्पेशल समर क्लासेज़’ का समापन एवं प्रमाण-पत्र वितरण समारोह शुक्रवार को अत्यंत भव्य और प्रेरणादायक माहौल में संपन्न हुआ। इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों, अभिभावकों, विद्यार्थियों और शिक्षा प्रेमियों ने भारी संख्या में शिरकत की।
नदवतुल उलेमा के नाज़िम-ए-आम की सरपरस्ती में हुआ आयोजन
कार्यक्रम की अध्यक्षता और सरपरस्ती हज़रत मौलाना अम्मार अब्दुल अली हसनी नदवी दामत बरकातुहुम (नाज़िम-ए-आम, नदवतुल उलेमा, लखनऊ) ने फरमाई। समारोह की शुरुआत मौलवी ज़ैनुल आबिदीन हसनी की तिलावते-क़ुरआन से हुई। इसके बाद मस्जिद वज़ीरगंज के इमाम मुफ़्ती सैफ़ुद्दीन नदवी ने स्वागत भाषण पेश करते हुए सभी अतिथियों का इस्तकबाल किया और सात दिनों तक चले इस शैक्षिक शिविर के उद्देश्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला।कार्यक्रम का कुशल और मनमोहक संचालन मौलाना मिस्बाहुन्नबी नदवी ने अपने विशिष्ट और प्रवाहपूर्ण अंदाज़ में किया, जिसने अंत तक श्रोताओं को बांधे रखा।
“आने वाली नस्लों को इस्लामी संस्कृति से जोड़ना समय की बड़ी ज़रूरत”
समारोह को संबोधित करते हुए मौलाना मोहम्मद अरमुगान बदायूनी नदवी ने “समर क्लासेज़ के उद्देश्य एवं संदेश” विषय पर गहरा वैचारिक वक्तव्य दिया। उन्होंने कहा:
”इन समर क्लासेज़ का मूल उद्देश्य नई पीढ़ी के भीतर ईमान, धार्मिक चेतना, इस्लामी स्वाभिमान और उत्तम चरित्र का निर्माण करना है। यदि हम अपनी आने वाली नस्लों को क़ुरआन, सुन्नत और अपनी संस्कृति से जोड़कर नहीं रखेंगे, तो हमारी सामूहिक पहचान और धार्मिक विरासत संकट में पड़ जाएगी। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता हैं।”
सम्मान समारोह, पुरस्कार और लाइव क्विज़
इस अवसर पर पिछले छह दिनों में बच्चों को प्रशिक्षित करने वाले सम्मानित वक्ताओं और उलेमा-ए-किराम को उनकी बेहतरीन शैक्षिक व धार्मिक सेवाओं के लिए स्मृति चिह्न (शील्ड) देकर सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि हज़रत मौलाना अम्मार अब्दुल अली हसनी नदवी के प्रति भी आयोजकों द्वारा विशेष कृतज्ञता और सम्मान प्रकट किया गया।
- पुरस्कार वितरण: शिविर में भाग लेने वाले सभी छात्र-छात्राओं को सहभागिता प्रमाण-पत्र, बहुमूल्य उपहार और ‘इस्लामिक स्टडी किट’ प्रदान की गई।
- लाइव क्विज़: कार्यक्रम के दौरान उपस्थित दर्शकों और बच्चों के लिए एक ज्ञानवर्धक प्रश्नोत्तर सत्र (Quiz) भी रखा गया। पिछले दिनों पढ़ाए गए विषयों से जुड़े सवालों के सही जवाब देने वालों को मौके पर ही तत्काल पुरस्कृत किया गया, जिससे पूरी सभा में उत्साह का माहौल बना रहा।
वैचारिक आक्रमणों के दौर में केवल औपचारिक शिक्षा पर्याप्त नहीं: हज़रत मौलाना अम्मार
अपने अध्यक्षीय संबोधन में हज़रत मौलाना अम्मार अब्दुल अली हसनी नदवी ने इस पवित्र प्रयास की सराहना करते हुए समाज को एक बड़ा संदेश दिया। उन्होंने फरमाया:
”किसी भी कौम का भविष्य उसकी नई पीढ़ी से जुड़ा होता है। अगर बचपन से ही बच्चों में ईमान, इबादत और नैतिकता की बुनियाद मज़बूत कर दी जाए, तो यही बच्चे आगे चलकर उम्मत और समाज के आदर्श निर्माता बनेंगे।”
उन्होंने आगे सचेत करते हुए कहा कि वर्तमान युग के फितनों और वैचारिक आक्रमणों के इस दौर में केवल आधुनिक या औपचारिक शिक्षा (Formal Education) काफी नहीं है, बल्कि बच्चों के चरित्र निर्माण और धार्मिक चेतना के लिए ऐसे निरंतर प्रयास अनिवार्य हैं। उन्होंने मस्जिद वज़ीरगंज की प्रबंध समिति और आयोजकों को इस मुबारक कदम पर बधाई दी और उम्मीद जताई कि यह सिलसिला भविष्य में भी जारी रहेगा।कार्यक्रम का समापन हज़रत वाला की अत्यंत भावपूर्ण और भावुक कर देने वाली दुआ के साथ हुआ।
