कागजों से निकलकर जमीन पर उतरा “पुलिस मित्र” का नारा
रायबरेली। आमतौर पर पुलिस चौकी का नाम सुनते ही आम आदमी हिचकिचाता है, लेकिन रायबरेली की सेमरी चौकी में इन दिनों माहौल बिल्कुल जुदा है। खाकी का खौफ अब अपराधियों में है और आम जनता के लिए यह चौकी “भरोसे का ठिकाना” बन चुकी है।इस बड़े बदलाव के पीछे हैं सेमरी चौकी प्रभारी कुलदीप सिंह बुंदेला—जिनकी ताबड़तोड़ कार्यशैली और ‘Zero Tolerance’ नीति की गूंज पूरे इलाके में सुनाई दे रही है।
न चक्कर काटने की टेंशन, न सिफारिश की जरूरत
स्थानीय लोगों की मानें तो कुलदीप सिंह बुंदेला के चार्ज संभालते ही सेमरी का क्राइम ग्राफ नीचे गिरा है। उनकी वर्किंग स्टाइल की 3 बड़ी खासियतें क्षेत्र में चर्चा का केंद्र बनी हुई हैं। सीधी जनसुनवाई: चौखट पर आए हर पीड़ित की बात बिना किसी मध्यस्थ के खुद सुनना। ऑन-द-स्पॉट एक्शन: छोटी-मोटी शिकायतों के लिए कोतवाली दौड़ने की जरूरत नहीं, चौकी पर ही तुरंत निस्तारण। रात की सतर्कता: सघन चेकिंग और गश्त के कारण अराजक तत्व क्षेत्र से रफूचक्कर हैं।
ग्रामीण बोले: “अधिकारी नहीं, अभिभावक जैसा व्यवहार”
स्थानीय निवासियों का स्पष्ट कहना है:
“पहले छोटी सी अर्जी के लिए भी समय और पैसा बर्बाद होता था। लेकिन जब से बुंदेला साहब आए हैं, पुलिस का रवैया एक रक्षक और परिवार के सदस्य जैसा अनुभव होता है। सेमरी चौकी में दिख रही यह तब्दीली साबित करती है कि अगर नीयत साफ हो और मंशा जनसेवा की, तो पुलिसिंग का चेहरा रातों-रात बदला जा सकता है। चौकी प्रभारी कुलदीप सिंह बुंदेला की यह पहल पूरे जनपद के लिए एक मिसाल बन रही है।
