रायबरेली | न्यूज प्लस रिपोर्ट डेस्क
रायबरेली। जिले के गदागंज पुलिस स्टेशन में हाल ही में हुए प्रशासनिक फेरबदल ने पुलिस महकमे और आम जनमानस के बीच एक नई बहस को जन्म दे दिया है। गदागंज थाने में प्रभारी निरीक्षक (SO/Inspector) के रूप में बालेंदु गौतम की दोबारा तैनाती (Re-posting) के बाद क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार बेहद गर्म है। हैरान करने वाली बात यह है कि गदागंज थाने के इतिहास में अब तक कभी भी किसी निरीक्षक की री-पोस्टिंग का रिकॉर्ड नहीं रहा है, जिसके चलते इस फैसले को लेकर विभागीय पारदर्शीता पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
क्या है पूरा मामला?
निरीक्षक बालेंदु गौतम इससे पहले भी गदागंज थाने की कमान संभाल चुके हैं। उनके स्थानांतरण के पश्चात विभाग द्वारा निरीक्षक दयानंद तिवारी को गदागंज थाने का नया प्रभारी नियुक्त किया गया था। हालांकि, कुछ ही समय बाद दयानंद तिवारी को हटाकर एक बार फिर बालेंदु गौतम को उसी थाने का प्रभार सौंप दिया गया।
परंपरा से हटकर फैसला, उठे कई तीखे सवाल
गदागंज थाने में हुई इस अनूठी री-पोस्टिंग को लेकर पुलिस महकमे के आंतरिक हलकों और स्थानीय जनता में कई तरह की चर्चाएं व्याप्त हैं:
- परंपरा का उल्लंघन: गदागंज थाने का ट्रैक रिकॉर्ड रहा है कि यहाँ कभी भी किसी अधिकारी की दोबारा तैनाती नहीं की गई। ऐसे में इस खास मामले में सभी पुरानी परंपराओं को दरकिनार करने की क्या वजह रही?
- अधिकारियों के चयन पर सवाल: क्या जिले में योग्य अधिकारियों की कमी है, जिसके चलते एक ही अधिकारी को बार-बार उसी सर्किल और थाने की ज़िम्मेदारी दी जा रही है?
- विभागीय मंशा: दयानंद तिवारी के संक्षिप्त कार्यकाल के तुरंत बाद हुए इस अचानक फेरबदल के पीछे का मुख्य कारण क्या है?
पुलिस प्रशासन का रुख
यद्यपि गदागंज थाने में हुई इस दोबारा तैनाती को लेकर पुलिस विभाग की ओर से कोई अलग से आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन सूत्रों का दावा है कि यह एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया और फेरबदल का हिस्सा है।
अब देखना यह होगा कि इस अभूतपूर्व री-पोस्टिंग के बाद गदागंज थाना क्षेत्र की कानून-व्यवस्था में क्या नया मोड़ आता है और उठ रहे सवालों पर आला अधिकारी क्या सफाई देते हैं।
