रायबरेली। गदागंज थाना क्षेत्र के धमधामा गांव में कानून और न्यायपालिका को ठेंगा दिखाने का एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां न्यायालय में मुकदमा विचाराधीन होने के बावजूद विवादित भूमि पर जबरन कब्जा करने और विरोध करने पर मारपीट व जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगा है।
क्या है पूरा मामला?
डलमऊ तहसील क्षेत्र के धमधमा गांव की रहने वाली निशा पत्नी लाल मोहम्मद ने गदागंज थाने में लिखित तहरीर दी है। पीड़िता का आरोप है कि गांव के ही पूर्व प्रधान मोहम्मद अमीन और नूर आलम न्यायालय में मामला विचाराधीन होने के बावजूद उस जमीन पर जबरन कब्जा करने की फिराक में हैं। पीड़िता के मुताबिक, आरोपितों द्वारा मौके पर सेक्टर लगाकर अवैध निर्माण और कब्जा किया जा रहा है। जब परिवार के लोगों ने इसका विरोध किया, तो दबंगों ने उन्हें गालियां दीं और अंजाम भुगतने की धमकी दी।
कानून और प्रशासन पर सवाल, न्यायालय के आदेशों की अवहेलना:
जब मामला सिविल या सक्षम न्यायालय में विचाराधीन है, तब किसी भी पक्ष द्वारा यथास्थिति बनाए रखना अनिवार्य होता है। इसके बावजूद पूर्व प्रधान द्वारा बलपूर्वक कब्जा करने का प्रयास सीधे तौर पर कानून व्यवस्था को चुनौती देना है। मारपीट की धमकी मिलने के बाद पीड़ित परिवार भय के साये में जीने को मजबूर है। उन्होंने स्थानीय प्रशासन से सुरक्षा और न्याय की गुहार लगाई है। मामला संज्ञान में आने के बाद अब देखना यह होगा कि गदागंज थाना पुलिस और डलमऊ तहसील प्रशासन इस मामले में क्या सख्त कदम उठाता है। क्या न्यायालय के विचाराधीन मामलों में दखल देने वाले दबंग पूर्व प्रधान पर पुलिस शिकंजा कसेगी या पीड़ित परिवार को दर-दर भटकना पड़ेगा?
