ललितपुर (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। पति की शराब की लत और लगातार मारपीट से परेशान एक 35 वर्षीय गर्भवती महिला ने अपने दो मासूम बच्चों के साथ ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या कर ली। घटना से पहले महिला गुहार लगाने पुलिस चौकी पहुंची थी, लेकिन परिजनों का आरोप है कि समय पर मदद न मिलने से निराश होकर उसने यह खौफनाक कदम उठा लिया।
यह हृदयविदारक घटना जाखलौन थाना क्षेत्र के धोररा गांव की है। मृतकों की पहचान 35 वर्षीय दीपा यादव, उसके 2 वर्षीय बेटे कृष और 3 वर्षीय बेटी शिवानी के रूप में हुई है। हादसे के दौरान दीपा की सबसे बड़ी बेटी ट्रेन को आते देख समय रहते पीछे हट गई, जिससे उसकी जान बच गई।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, दीपा यादव अपने शराबी पति विक्की यादव की मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना से लंबे समय से त्रस्त थी। सोमवार सुबह वह अपने तीनों बच्चों को लेकर पुलिस चौकी पहुंची थी और पति के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
परिजनों और स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस ने तत्काल मौके पर जाने में असमर्थता जताई। पुलिस की इस टालमटोल से बेहद निराश और क्षुब्ध होकर दीपा बच्चों को लेकर बीना जंक्शन की ओर जा रहे रेलवे ट्रैक पर पहुंच गई और आती हुई ट्रेन के सामने छलांग लगा दी। दीपा, उसके बेटे कृष और बेटी शिवानी की मौके पर ही कटकर दर्दनाक मौत हो गई।
पुलिस का पक्ष और निलंबन की कार्रवाई
मामले में चौकी प्रभारी विनोद कुमार का कहना था कि महिला सुबह चौकी आई थी। उसने बताया कि वह दो महीने की गर्भवती है और गर्भपात कराना चाहती है, जिसे लेकर पति मारपीट करता है। चौकी प्रभारी के अनुसार, उन्होंने महिला को समझाया कि गर्भपात कानूनी अपराध है और वे उसके साथ घर चलने ही वाले थे कि कुछ ही देर में आत्महत्या की सूचना आ गई।
वहीं, पुलिस क्षेत्राधिकारी (CO) अजय कुमार ने बताया कि शुरुआती जांच में घरेलू हिंसा और पति की शराब की लत मुख्य वजह सामने आई है। मामले की गहन जांच की जा रही है।
कार्रवाई: घटना के बाद पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर खड़े हो रहे गंभीर सवालों के बीच विभागीय स्तर पर कार्रवाई की गई है। प्रथम दृष्टया लापरवाही बरतने के आरोप में संबंधित चौकी इंचार्ज विनोद कुमार को निलंबित कर दिया गया है। जीआरपी ने तीनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
संवेदनशीलता और व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर प्रशासनिक संवेदनशीलता और पुलिस की त्वरित कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं:
- क्या शिकायत लेकर पहुंची महिला पर तुरंत एक्शन लिया जाता, तो तीन जिंदगियां बच सकती थीं?
- घरेलू हिंसा की शिकार महिलाओं के लिए पुलिस का रवैया और कितना संवेदनशील होने की जरूरत है?
ललितपुर जिले में लगातार बढ़ती आत्महत्या की घटनाएं और घरेलू हिंसा के मामले अब गंभीर चिंता का विषय बनते जा रहे हैं।
(News Plus Report की विशेष रिपोर्ट)
