
लखनऊ।रमज़ान का महीना मुसलमानों के लिए रहमत, बरकत और मग़फिरत का महीना माना जाता है। इसी पवित्र महीने के आख़िरी अशरे में आने वाली शब-ए-क़द्र को इस्लाम में बेहद खास और मुक़द्दस रात बताया गया है। माना जाता है कि इसी रात अल्लाह तआला ने कुरान शरीफ को नाज़िल करना शुरू किया था, इसलिए इस रात की अहमियत और भी बढ़ जाती है।इस्लामिक मान्यता के अनुसार शब-ए-क़द्र की इबादत का सवाब हजार महीनों की इबादत से भी बेहतर बताया गया है। इस रात मुसलमान पूरी रात जागकर नमाज़ पढ़ते हैं, कुरान की तिलावत करते हैं और अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं। मस्जिदों में भी विशेष नमाज़ और इबादत का माहौल देखने को मिलता है।रमज़ान के आख़िरी दस दिनों में आने वाली इस रात को लेकर लोग खास तैयारी करते हैं और ज्यादा से ज्यादा इबादत करने की कोशिश करते हैं। माना जाता है कि इस रात में की गई दुआएं अल्लाह जरूर कबूल करता है और बंदों पर अपनी रहमत बरसाता है।इसी वजह से शब-ए-क़द्र मुसलमानों के लिए बेहद अहम और बरकतों वाली रात मानी जाती है।
